बातचीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बातचीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

3/24/2009

चुनाव आयोग के निर्देशों पर विचार-गोष्ठी

रायपुर । राजधानी की सक्रिय संस्था लोकमान्य सद्-भावना समिति के अध्यक्ष तपेश जैन ने बताया है कि कल २५ मार्च, २००९ को स्थानीय अमिट होटल में शाम ४ बजे नगर के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, कलाकारों, रंगकर्मियों, पत्रकारों, समाजसेवियों, सहित आम नागरिकों की एक विचार-गोष्ठी आयोजित है ।
इस विचार-गोष्ठी का केंद्रीय विषय है - केंद्रीय चुनाव के आदेश और प्रजातंत्र । श्री जैन ने बताया है कि विगत दिनों जिस तरह से आयोग ने आदर्श आचरण संहिता के नाम पर आदेश जारी किये हैं वे उस निष्पक्षता के लिए तो आवश्यक हैं किन्तु उसके पीछे के कारणों पर भी चिंतन ज़रूरी है । उसके परिणामों को देखने से वे तानाशाहिता को भी प्रदर्शित करते हैं । कुछ ऐसे आदेश भी हैं जिस पर एकतरफा कार्यवाई तो की गई है किन्तु उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई है । यह एक तरह से नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति के अधिकारों का भी हनन है । यद्यपि आयोग को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं जिसके आलोक में वह ऐसा कार्य कर सकता है किन्तु इसकी भी गांरटी आयोग को लेनी होगी जो राज्य या किसी व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों, स्वस्थ परंपराओं पर कुठाराघात सिद्ध न हो ।
श्री जैन ने इस संगोष्ठी में खुली चर्चा व विचार हेतु सर्वसंबंधितों को आमंत्रित किया है ।

10/28/2007

35 वर्षों से 17 घंटे प्रतिदिन रेडियो सुनने वाला शख्स

रेडियो कभी नहीं मर सकता, खासकर तब जब मोहनलाल देवांगन जैसे लोग हों और उनकी दीवानगी बची रहे । दरअसल रेडियो है ही ऐसी चीज़ जिसे भी इसका चस्का लग जाये, जो भी इसके महत्व को जान ले, शायद ही वह रेडियो से दूर हो सकता है । जी हाँ, हम यहाँ ऐसे ही नायाब रेडियो प्रेमी के बारे में कुछ कहने जा रहे हैं जो विगत 35 वर्षों से प्रतिदिन 17 घंटे रेडियो सुनते हैं । उनका रेडियो तभी बंद होता है जब वे सो जाते हैं । आपके मन में प्रश्न उठ खड़ा हो रहा होगा कि वे जब चलायमान होते हैं तो कैसे करते हैं ? चलिए हम ही बताये देते हैं – उनकी साइकिल और मोटर सायकिल में भी रेडियो वर्षों से शोभा बढ़ा रहा है । वे चाहे काम पर हों या कहीं यात्रा पर हों उन्हें रेडियो के बिना देख पाना असम्भव सा है । हमें जब पता चला तो जिज्ञासा हुई कि उनसे मिला जाय। आख़िर यह शख्स करते क्या हैं ? यानी कि उनकी दिनचर्या क्या है । उनसे मिलने का जिम्मा उठाया मेरे बेटे ने । दरअसल मुझे समय भी नहीं निकाल पा रहा था । मैंने ताकीद किया – गुणी आदमी होंगे । पर तुम सहजता से बातचीत करना । बेटा प्रशांत जब मिला तो वह भी आश्चर्य हो उठा । उसने पहली ही बार में देवांगन से बातों ही बातों में साक्षात्कार जैसी चीज तैयार कर लीं । पेशे से टेलरिंग का काम करने वाले श्री देवांगन अपनी सिलाई के लिए भी जाने जाते हैं । उनके टेलरिंग शाप में कई कारीगर काम करते हैं । अब तो मेरा बेटा भी स्कूल से लौटते वक्त उनके शॉप से होकर ही घर लौटता है । वह बताता है कि चाहे कितना बड़ा आदमी भी उनके पास सुट सिलवाने क्यों न आये वे रेडियो बंद नहीं करते । लोग उन्हें टी.वी.चैनलों की बात करते हैं पर पर हँसकर टाल देते हैं । वे मानते हैं कि रेडियो ज्ञान-विज्ञान के बीच मनोरंजन का साधन है पर टी.व्ही. मनोरंजन के दुनिया से निकलने ही नहीं देता । आँखे भटकती रहती हैं । बहरहाल पढिये आप भी किशोर बालक प्रशांत और रेडियो के दीवाने श्री देवांगन के बीच हुई बातचीत का सारांश - संपादक


प्रश्न - आप रेडियो कब से सुनते है ?
उत्तर - 1972 से रेडियो सुनना प्रारंभ किया और पिछले 35 साल से सुन रहा हूँ।


प्रश्न - सबसे पहले किस उद्घोषक की आवाज़ में रेडियो सुना और कौन सा कार्यक्रम ?
उत्तर - मैनें सबसे पहले उद्घोषक बरसाती भैया और बिसाहू भैया की आवाज़ में चौपाल नामक कार्यक्रम सुना।


प्रश्न - आप पहले कौन से कार्यक्रम सुना करते थे ?
उत्तर - घर आंगन बिंदिया, आप मन के गीत, सुर-श्रृंगार, आप के गीत।


प्रश्न - आप का सबसे पहला पत्र कब और किस कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ ?
उत्तर - मेरा पहला पत्र -आपके मीत ये गीत कार्यक्रम में 1983 में लाल राम कुमार सिंह के द्वारा सम्मिलित किया गया।


प्रश्न - कहाँ-कहाँ सुनते हैं ?
उत्तर - घर में 6-9, फिर मोटर साइकिल में । दुकान में तो आप देख ही रहे हैं ।


प्रश्न - रेडियो के बिना कैसा लगता है ?
उत्तर - लगता है जैसे दम निकल रहा हो । रेडियो मेरी प्राण है । इसके विना में नहीं रह सकता हूँ। बिजली नहीं तो बैटरी से सुनता हूँ ।


प्रश्न - आप कहां के रहने वाले हैं ?
उत्तर - वैसे तो मेरा निवास ग्राम कुम्हारी, थाना आरंग,पोस्ट गौरभाठ, जिला रायपुर छ।ग. है। पर अब वर्षों से शक्ति नगर, मेन रोड (शंकर नगर) रायपुर छ.ग. में रहता हूँ । मेरा टेलरिंग का कार्य है, जो कटोरा तालाब, रायपुर छ.ग. मे स्थित है।


प्रश्न - रेडियो से कैसे जुड़े ?
उत्तर - गाँव में स्थानीय मनोरंजन के साधनों के अलावा एक रेडियो ही था जो संचार और सूचना के साथ-साथ मनोंरजन का खास जरिया था । तब गाँव भर के लोग बड़े चाव से रेडियो सुना करते थे । वह सबसे विश्वसनीय माध्यम भी था । बचपन से रेडियो सुनते-सुनते मैं इतना रमने लगा कि आज और अभी तक रेडियो से जुड़ा हूँ।


प्रश्नौ - यदि हम घंटो की बात करें तो आप प्रतिदिन कितने घंटे रेडियो सुनते हैं ?
उत्तर - सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक (17 घंटा) सुनता हूँ।


प्रश्न - रेडियो से जुड़ने के पीछे मनोरंजन महत्वपूर्ण था या कुछ और ?
उत्तर - मनोरंजन तथा कार्यक्रम की विविधता, ज्ञानवर्धन और नाम प्रसिद्ध पाना।


प्रश्न - आपके प्रिय रेडियो स्टेशन कौन से हैं ?
उत्तर - क्षेत्रीय स्टेशनों में आकाशवाणी रायपुर और अंतराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय विविध भारती प्रसारण सेवा तथा एफ।एम. जो कि हमारे लिए दिल की धड़कन है।


प्रश्न -आप किन-किन भाषाओं में रेडियो सुनते हैं ?
उत्तर - हिन्दी, छत्तीसगढ़ी सिन्धी व पंजाबी भाषाओं में रेडियो सुनता हूं।


प्रश्न - आपके पत्र किस किस रेडियो स्टेशन से प्रसारित हो चुके हैं ?
उत्तर - आकाशवाणी रायपुर, इंदौर, ग्वालियर, बिलासपुर, विविध भारती, विविध भारती-एफ।एम. ऑल इंडिया उर्दू सर्विस आदि में प्रसारित हो चुके हैं। बीबीसी आदि कई विदेशी रेडियो स्टेशनों में भी


प्रश्न - आज मनोरंजन के दूसरे माध्यम जैसे टी.व्ही., वेब मीडिया जोरों पर है ऐसे में भी रेडियो पर जुड़ाव का क्या कारण है ?
उत्तर - आज के इस दौर में टी।व्ही. और वेब मीडिया कितना भी आ जाये और जो रेडियो में बात है वह किसी में नहीं है क्योंकि यह जीवन, दिनचर्या में कभी रूकावट नहीं करता, यही रेडिया से जुड़ाव का कारण है।


प्रश्न - रेडियो उद्घोषकों में आप किसे सर्वाधिक पसंद करते हैं और क्यों ?
उत्तर - क्षेत्रीय श्री श्याम वर्मा जी (उद्घोषक) उनकी आवाज् में मधुरता और हंसमुख के व्यक्ति हैं, हरेक के दिलों में समा जाने वाले व्यक्ति है। अंतरराष्ट्रीय विविध भारती के उद्घोषक कमल शर्मा जी के बारे में कहा जाये तो इनसे जब फोन इन फरमाइश कार्यक्रम में बातें होती है तो उनकी बातों से कमल के फूल की तरह, प्रकृति की याद दिलाती है और इनके बारे में जो कहे वह कम है। अमीन सयानी के बारे में क्या बतायें । लगता था उन्हें चौबीसों घंटे सुनते रहें ।


प्रश्न - रेडियो की समाज में उपयोगिता क्या है ?
उत्तर - रेडियो की समाज के लिए उपयोगिता है, जैसे बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय ज्ञानवर्धक बातें दूर दूर से इसके माध्यम से पहुँचता है।


प्रश्न - क्या रेडियो पहले जैसे स्थापित हो पायेगा ?
उत्तर - हाँ। रेडियो एवं ऐसा माध्यम है जिसे अपने कार्य करते हुए बिना डिर्स्टबेन्स के सुना जा सकता है। लोगबाग़ टीव्ही से उबने लगे हैं । रेडियो खासकर एफएम सुनने वाले लगातार बढ़ रहे हैं ।


प्रश्न - आपके पास पहला पत्र किस श्रोता का आया, और कहां से ?
उत्तर - हमारे पास पहला पत्र खेमूराम साहू / ग्राम सिंगदई, जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़ से आया।


प्रश्न - पत्र पाकर आपको कैसे लगा और क्या अनुभूति हुई ?
उत्तर - उनका पत्र पाकर मैं झूम उठा और रेडियो के माध्यम से उनको धन्यवाद दिया और मैने पत्र भी लिखा।


प्रश्न - क्या आप अपनी जिन्दगी कुछ परिवर्तन पाते हैं रेडियो के कारण ?
उत्तर - मेरे ज़िन्दगी में बहुत कुछ परिवर्तन हुआ। रेडियो के माध्यम से देश-प्रदेश के श्रोता लोग मुझे जानने लगे, पत्र भेजने लगे और मिलने के लिए आते रहते हैं। सैकड़ों लोग मुझसे मिलने आ चुके हैं ।


प्रशान्त रथ