5/14/2007

छत्तीसगढ़ी में भाषण देने वाले पहले राज्यपाल बने नरसिंम्हन

रायपुर । छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच ने 1857 की क्रांति के 150 वर्ष पर आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ी में उद्बोधन दिये जाने पर महामहिम राज्यपाल श्री ई.नरसिम्हन को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया है । मंच ने संभाग एवं राज्य स्तर पर विभिन्न प्रकोष्ठों का निर्माण कर राज्य भर में जनजागरण प्रारंभ करने का निर्णय भी लिया है ।

छत्तीसगढी राजभाषा मंच की संभागीय बैठक में कल 13 मई को राजधानी में यह प्रस्ताव पारित किया गया । साहित्यकारों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने महामहिम राज्यपाल मंडल द्वारा छत्तीसगढ़ी में उद्बोधन दिए जाने को ऐतिहासिक करार देते हुए उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर की । राज्य निर्माण के 7 साल बाद यह पहला मौका था जब किसी राज्य के प्रथम नागरिक ने अंग्रेज़ी या हिंदी में भाषण न देते हुए स्थानीय बोध को तरजीह देते हुए राज्य की 2 करोड़ जनता की भाषा छत्तीसगढी में अपनी बात रखा ।

आज हुई बैठक के अनुसार मंच ने मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री तथा राजकीय प्रतिनिधियों से भी शासकीय एवं सार्वजनिक समारोहों में छत्तीसगढी भाषा का उपयोग करने का आव्हान किया है । बैठक में साहित्यकार जयप्रकाश मानस ने सुझाया कि शासकीय प्रपत्रों में छत्तीसगढ़ी में नारा, शासकीय विज्ञापनों की छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रतीकात्मक रूप से प्रारंभ किया जाना चाहिए । प्राथमिक स्तर पर संचालित पाठ्यपुस्तको में छत्तीसगढ़ी भाषा में पाठ्यसामग्री रखा जाना चाहिए । रंगकर्मी रसिक बिहारी अवधिया ने सुझाया कि नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से राज्य भर में लोक जागरण का अभियान भी प्रारंभ किया जा सकता है । वरिष्ठ पत्रकार एच.एस. ठाकुर का मानना था कि मीडिया से जुड़े वरिष्ठ जनों से मिलकर उन्हें इस दिशा में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए । राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के सचिव डॉ. सुधीर शर्मा ने प्रमुख शहरों में सभाएं हों ताकि शहरी लोग जो छत्तीसगढी से दूर होते जा रहे हैं में अपनी मातृभाषा को वास्तविक दर्जा दिलाये जाने के लिए अनुप्रेरित हो सके । वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. रामकुमार बेहार ने इस दिशा में कारगर ढंग से शैक्षिक संगठनों के उन्मुखीकरण पर बल दिया । वरिष्ठ समाजसेवी और पत्रकार जागेश्वर प्रसाद ने अभियान को जिला, विकासखंड और ग्राम स्तर पर संचालित करने की रणनीति पर विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत किया ।

इस बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी और पत्रकार नंदकिशोर शुक्ला ने की जिसमें शिवशंकर शुक्ल, रामेश्वर वैष्णव, गौतम पटेल, आदेश ठाकुर, डॉ. अनंतधर शर्मा आदि की प्रमुख भूमिका रही ।


प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री की चर्चा इसी माह
ज्ञातव्य हो कि पिछले दिनों 11 मई को मंच के बैनर तले प्रदेश भर के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों ने मिलकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को एक ज्ञापन देकर छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने की स्थायी मांग दोहरायी थी जिस पर उन्होने इसी माह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलकर राज्य के प्रमुख 6 एजेंडे में शामिल करते हुए पहल करने का आश्वासन दिया था। इस मुद्दे को लेकर मुंख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य के साहित्यकारों की एक बैठक भी 11 मई 2007 को हुई थी जिसमें विधि एवं राजभाषा मंत्री ब्रजमोहन अग्रवाल व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बाँधी सम्मिलित हुए थे । इसी बैठक में इस लोकव्यापी मांग को पूर्ण कराने के लिए राज्य स्तर पर श्री अग्रवाल को समन्यवक बनाया गया है । इसके पहले पूर्व सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा संकल्प पारित कर छत्तीसगढी को राजभाषा का दर्जा देते हुए संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की शासकीय प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया जा चुका है जो आज तक लंबित है । राज्य भर में केंद्र सरकार द्वारा अन्य भाषाओं को तरजीह देने और छत्तीसगढ़ी जैसे महत्वपूर्ण भाषा की उपेक्षा पर माहौल गरम है । बुद्धिजीवी, पत्रकार, शिक्षाविद्, साहित्यकार, रंगकंर्मी और राजनैतिक दल सभी इस विषय पर सक्रिय होने लगे हैं । जगह-जगह बैठकें होनी शूरू हो चुकी हैं । लोग संगठित होने लगे हैं ।
(सुधीर शर्मा की रिपोर्ट)

3 टिप्‍पणियां:

Sanjeet Tripathi ने कहा…

एक नई पहल के लिए उन्हें साधुवाद!

dhurvirodhi ने कहा…

अच्छी सूचना हैं
वैसे भाषा का अर्थ है अभिव्यक्ति का साधन भर.
यदि वहां के लोग छत्तीसगड़ी में अभिव्यक्ति को अधिक समझते हैं तो यहौ सही है.

नीरज दीवान ने कहा…

राजपाल मोला खुस कर दीस.. जय हो महाराज.