8/07/2007

अब छत्तीसगढ़ी मे बोलेगा कंप्यूटर

(हरिभूमि में प्रकाशित टिप्पणी)


जी हाँ । यह सौ फीसदी सही है । कभी हम हिदीं का एक शब्द कंप्यूटर पर टाइप नही कर पाते थे । इंटरनेट पर हिदीं का एक शब्द देखने को तरस जाते थे । अब न केवल हमारा कंप्यूटर हिदीं में बोलने लगा है, इंटरनेट पर हिदीं के लाखों-करोड़ों पेज उपलब्ध हो चुके हैं । इतना ही नहीं, अब तो कंप्यूटर का पूरा का पूरा आपरेटिंग सिस्टम भी छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलने वाला है । और इसे किसी विदेशी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के इंजीनियरों ने नहीं बल्कि हमारे अपने छत्तीसगढ़ के रवि रतलामी ने सही साबित कर दिखाया है । जो धनाभाव में अटका पड़ा है ।

रवि रतलामी मूलतः धमतरी जिले के निवासी हैं जो मध्यप्रदेश से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर इन दिनों रतलाम में रहते हैं । उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा काम करने वाला पूरा आपरेटिंग सिस्टम बनाने का गुर हासिल कर लिया है, जो किसी प्रोत्साहन और धनाभाव के कारण बाजार में आने से वंचित है । ऐसा नहीं है कि उन्होंने छत्तीसगढी का राग अलापने वाली सरकार के समक्ष अपना प्रस्ताव नहीं रखा । वे बताते हैं – मैंने कई बार राज्य के आईटी विभाग को ई-मेल किया परन्तु जैसा कि हम जानते हैं राजकाज तो फाइलों में होता है, आज तक कोई निर्णय या आश्वासन उन्हें नहीं मिल सका है । उनके अनुसार पत्राचार को लगभग 3-4 साल व्यतीत हो चुके हैं ।

यदि यह सुविधा छत्तीसगढ़ के आम उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध हो सके तो वे अंग्रेजी ज्ञान के बिना भी कंप्यूटर का संचालन कर सकेगें । रवि अपने महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में कहते हैं - मैं जन्म से छत्तीसगढ़िया हूँ । यहाँ की मिट्टी की महक सदैव मुझे आकर्षित करती है । मेरा सपना है कि छत्तीसगढ़ी भाषा में ऑपरेटिंग सिस्टम (http://cg-os.blogspot.com ) हो, उसमें कार्य करने को अनुप्रयोग हों । गनोम 2.1 डेस्कटॉप युक्त छत्तीसगढ़ी लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम वर्ष भर की मेहनत से तैयार हो सकता है । हमारे पास तमाम तकनीकी कौशल इसके लिए है । हमने हिन्दी के लिए कार्य किया ही है । इस कार्य के लिए कुछ आर्थिक संबल की आवश्यकता है। देखते हैं कब यह सपना पूरा होता है।

रवि दो करोड़ लोगों द्वारा प्रयुक्त और भारत के नवोदित राज्य छत्तीसगढ़ की प्रमुख भाषा-छत्तीसगढ़ी में आपरेटिंग सिस्टम बनाने वाले प्रथम टेक्नोक्रेट हैं, इस नाते छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ के विकास में ऐतिहासिक योगदान देने वाले भी । कुछ दिनों पहले ही उन्हें विश्व की सबसे बड़ी साफ्टवेर कंपनी माइक्रोसाफ्ट द्वारा माइक्रोसॉफ्ट मोस्ट वेल्युबल प्रोफेशनल्स का पुरस्कार 2007 से नवाजा जा चुका है । इतना ही नहीं उन्हें माइक्रोसॉफ्ट द्वारा गत वर्ष का सर्वेश्रेष्ठ ब्लागर्स का एवार्ड भी मिल चुका है ।

छत्तीसगढ़ी भाषा में आपरेटिंग सिस्टम लांच करने पर हानि ही हानि ही है क्योंकि इसका बाजार छत्तीसगढ़ में लगभग शून्य है पर छत्तीसगढ़ी भाषा प्रेम और माटी की पुकार ने उन्हें छत्तीसगढ़ी भाषा में आपरेटिंग सिस्टम बनाने के लिए प्रेरित किया । विश्व की कोई ऐसी कंप्यूटर कंपनी नहीं है जो कभी छत्तीसगढ़ी में आपरेटिंग सिस्टम तैयार करायेगी । क्योंकि इसके लिए कोई बाजार ही नहीं है । छत्तीसगढ़ में यूँ भी लोग-बाग ओपन सोर्स द्वारा उपलब्ध सॉफ्टवेर उपयोग में लाते हैं । उनमें साफ्टवेयर खरीदने की क्रयशक्ति भी नहीं है । आम छत्तीसगढ़िया अग्रेजी भी नहीं जानता और इस तरह से वह कंप्यूटर के उपयोग करने से वंचित हो जाता है । छत्तीसगढी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है और छत्तीसगढ़ी भी हिंदी समूह की भाषा है । छत्तीसगढ़ी में कंप्यूटर तैयार होने से कंप्यूटर के प्रति ललक और उपयोग करने के विश्वास की संभावना को लेकर रवि रतलामी काम कर रहे हैं तो यह छत्तीसगढ़ की सरकार और समाज के लिए भी गौरव की बात है और इसका स्वागत किया ही जाना चाहिए । 2 करोड़ की आबादी वाले राज्य और हजारों करोड़ रूपयों वाली सरकार के रहते यदि उन्हें प्रोत्साहन नहीं मिल सका तो शायद यह छत्तीसगढ़ी भाषा और भाषियों का दुर्भाग्य भी होगा ।

जहाँ तक लागत का प्रश्न है छत्तीसगढ़ी आपरेटिंग सिस्टम प्रोजेक्ट के तहत सेटअप और बुनियादी कार्य रवि द्वारा पूर्व में ही किया जा चुका है । अब इस कार्य में लगभग 5000 डालर की आवश्यकता होगी जो मूलतः कंप्यूटर में भाषायी स्थानीयकरण पर खर्च होगा, और जिसके लिए वह सक्षम भी नहीं है । इसमें अनुवादको, टायपिस्टों, भाषाविदों की सेवाओं पर भारी राशि खर्च होगी । । ऐसा नहीं है कि रवि रतलामी ने इसके लिए सार्वजनिक प्रयास नहीं किया । माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने इस सॉफ्टवेयर को लेकर बाजार की स्थिति का जायजा लेकर इससे मुँह बिचका दिया । रतलामी ने इंटरनेट और अखबारों के माध्यम से 1-1 डालर की सहायता का आव्हान भी किया था । ताकि अधूरी परियोजना का पूर्ण कर आम उपभोक्ता को आपरेटिंग सिस्टम का सॉफ्टवेयर मुफ्त में उपलब्ध कराया जा सके । किन्तु कोई खास उपलब्धि नहीं हासिल नहीं हुआ । विश्वास किया जाना चाहिए कि राज्य का कोई विश्वविद्यालय, कोई अकादमी, संस्कृति विभाग या राज्य सरकार का आईटी विभाग रवि रतलामी की ईजाद पर विचार करेगा । यदि ऐसा संभव हो सका तो 10 के भीतर छत्तीसगढ़ी भाषा का राग अलापने वाले राजनीतिज्ञों के राज्य का हर व्यक्ति छत्तीसगढ़ी भाषा वाला कंप्यूटर चला सकेगा ।

2 टिप्‍पणियां:

आलोक ने कहा…

क्या छत्तीसगढ़ी को भारत सरकार भाषा मानती है?

Sanjeeva Tiwari ने कहा…

मुझे याद तो नहीं आ रहा है किन्‍तु पिछले दिनों ऐसा ही एक पोस्‍ट किसी ने डाला था जिसमें रवि जी ने प्रकाश डाला था । रवि जी का प्रयास सराहनीय है किन्‍तु आलोक जी की बात भी सौ प्रतिशत सहीं है जहां हम छत्‍तीसगढी को राजभाषा बनाने की इच्‍छा शक्ति को कायम नहीं रख सकते वहां के शासक प्रशासक इस भाषा को सहजता से कम्‍प्‍यूटर की भाषा बनायेंगे यह बात गले से नहीं उतरती हां इसके लिए जारी बजट की बंदरबांट यदि होनी निश्चित हो जाये तो इसकी घोषणा जाते जाते शासन कर सकती है किन्‍तु रवि जी इसे स्‍वीकारेंगें मैं नहीं मान सकता, इसके बाद तो सत्‍य का राज होगा ही ।

आपका पोस्‍ट हैडिंग सच हो आपके मुह में घी श्‍क्‍कर ।

बधाई !
“आरंभ” संजीव का हिन्‍दी चिट्ठा