5/19/2006

जयप्रकाश मानस की 2 बाल कविताएँ


मजा चखायेंगे

गीति-नीति गये बाजार,
लाये दर्जन भर अनार।

अनार में लाल दाना नहीं,

मम्मी से बोले ‘खाना नहीं’ ।

अबकी मजा चखायेंगे,
कागज के नोट दे आयेंगे ।


पुलिस उसे लेगी पकड़,
रोयेगा नाक रगड़-रगड़ ।



माँ को खबर लगाती गौरैया

चीं-चीं, चीं-चीं गाती गौरैया,
किसी से ना घबराती गौरैया ।

पास खेलती पास गये तो,
फुर्र से उड़ जाती गौरैया ।

धूम मचाती दिन भर घर में,
शाम ढले सो जाती गौरैया ।

दर्पण में देख रूप अपना,
चोंच उससे लड़ाती गौरैया ।

दूध चुराने जब आती बिल्ली,
माँ को खबर लगाती गौरैया ।

छोटी सी है प्यारी-प्यारी,
रूठकर दूर ना जाती गौरैया ।

जयप्रकाश मानस

1 टिप्पणी:

रजनीश मंगला ने कहा…

बहुत अच्छे