6/04/2007

सतनाम पंथ के गुरु बालदास से विशेष बातचीत

साक्षात्कार
जनता जब आक्रमक होगी तब ही परिवर्तन होगा

शिरोमणी बाबा गुरु घासीदास गुरुदास गुरुगद्दी भंड़ारपुरी के गद्दी नशीन धर्म गुरू बालदास साहेब इन दिनों अपने तीखे तेवर और आग उगलते बयानों के लिए चर्चा में है। सतनाम पंप के धाम बोड़सरा गुरूद्वारा की मुक्ति और सतनाम पंथ की संस्कृति और परम्परा को कायम रखने के लिए गुरु बालदास जी के प्रयास ने एक बार फिर करवट ली और समाज में एक नयीं चेतना का संचार हुआ है। राजनैतिक पार्टियों के लिए वोट बैंक माने जाने वाले समाज ने आजादी के बाद भी वह मुकाम हासिल नहीं किया है जिसका ढिढ़ोरा कई सालों से पीरा जा रहा था कि बीस–पच्चीस साल में तस्वीर और तकदीर बदल जायेगी।

स्वतंत्रता के 60 साल बाद भी समाज में ऊंच-नीच की मानसिकता आजाद नहीं हुई है। अभी भी गांव और शहरों में भी कहीं न कहीं भेदभाव की भावनाएं मौजूद है। गंदी राजीति और भ्रष्टाचार के ज़माने में सरकार से ये उम्मीद करना कि वह दबे-कुचले लोगों का सही में विकास करेगी बेमानी ही है। अब आशाएं न तो राजनेताओं से है और ना ही भष्ट अधिकारीयों से। फिर किस पर भरोसा करें, आखिर कड़ी जनता ही बचती है और यहीं वह आखरी उम्मीद है कि किरण है। श्री बालदास गुरु का कहना है परिवर्तन तव ही होगा जब जनता आक्रामक होगी और वे इस दिशा में ही आगे बढ़ रहे है। सरकारों को चेत जाना चाहिए कि अब सत्ता के दांवपेंच से आंदोलन के स्वर को बदल नहीं पायेंगे। प्रस्तुत है। गुरू बालदास से संपादक तपेश जैन की लंबी बातचीत के प्रमुख अंश

- संत शिरोमणी गुरु घासीदास जी ने सतनाम पंथ का जो संदेश दिया वह कितना प्रासंगिक है ?

0 परमपूज्य बाबा जी ने जो संदेश अहिंसा भाईचारा और समरसता का दिया वह आज ज्यादा प्रासंगिक है। उस समय और जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांट दिया गया तब “मनखे-मनखे मन एक है।” और एक ही रास्ते से मानव इस धरती पर आया है और एक ही रास्ते से वापस जायेगा इसलिए सभी मनुदप समान है की जो बात उन्होने कही वह सर्वकालिक है। संतों की वाणी सब काल में प्रासंगिक होती है। आज भी लोग धर्म और जाति के नाम पर अलगाव की धारा में बह रहे हैं। इस कारण से सभी समाज का विकास अवरूदृ हो रहा है। खान-पान जिस तरह से दूषित हो गए है परम पूज्य बाबा जी ने जो संकेत दिए उस मार्ग पर महात्मा गांधी चले। इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को होगी कि महात्मा गांधी जी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ के भंड़ारपुरी भी आए और वहां तीन बंढऐ की मूर्ति देखी और फिर संदेश दिया कि बरा मत कहो, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनों ।

- परम पूज्य गुरु घासीदास जी ने भी क्या ये संदेश दिया था ?

0 बाबा जी का संदेश कुछ भिन्न था कि सत्य बोलें, सत्य सुने और सत्य देखें । सब जानते हैं कि बाबा जी ने जो सत्य का रास्ता दिखाया वह व्यक्ति को जीवन जीने का पाठ सिखाता है ।

- समाज के लोग इतने साल बाद भी विकास की धारा में शामिल नहीं हो सके है क्या वजह है ?

00 शिक्षा का जितना प्रसार होना चाहिए वह नहीं हुआ । वोट बैंक की राजनीति ने समाज का बहुत नुकसान किया है । भेदभाव की वज़ह से समाज विरोधी ताकतों ने न केवल शिक्षा का प्रसार रोका बल्कि राजनैतिक, धार्मिक और आर्थिक क्षेत्र में भी विकास अवरुद्ध किया । सरकारों को भी जो प्रयास करना चाहिए था वह गंभीरता से नहीं किए । एक मुद्दे को लेकर विकास को आगे बढ़ाने की जगह धार्मिक आधार पर वोट बैंक की राजनीति करती कहीं सरकारें ।

- योजनाएं तो बहुत सारी बनाई है सरकार ने उत्थान के लिए ?

00 क्या योजनाएं बनी है ? कागजों में होंगी सब, धरातल पर तो कुछ नज़र नहीं आता अगर योजनाएं है तो सरकार के आला मंत्री उसकी समीक्षा करें कि क्या हो रहा उन योजनाओं का । उच्च शिक्षा के लिए सरकार के पास क्या योजनाएं हैं बताएं हमें ?

- अगर ऐसा है तो समाज आवाज़ क्यों नहीं उठता ?

00 समाज में एकजूटता की कमी है । अब लोग जागरुक हो रहे हैं । अपने हक और अधिकार के लिए स्वाभिमान के साथ आवाज़ उठेगी । अधिकारों के लिए संघर्ष होगा । छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बात बहुत उम्मीदें जागी थी सरकारों से । पहले कांग्रेस सरकार और अब भाजपा सरकार का कामकाज जनता देख चुकी है । आज गांव-गांव में बेरोजगारी है, विकास के तमाम दावे कसौटी पर कितनी खरी उतरती हैं सरकार वो तो जनता चुनाव में बता ही देती है ।

- आपके मन में क्या है, किस तरह की योजनाएं बननी चाहिए ?

00 हमारे मन में है कि समाज के लोग उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें । अभी इस दिशा में आगे बढ़ नहीं पाए हैं । सरकार उच्च शिक्षा के लिए अच्छी व्यवस्था करें वहीं रोजगार के लिए स्थानीय उद्योगों में आरक्षण के साथ ही रोजगार के लिए नए विकल्प तलाशे जाएं । वन राज्य छत्तीसगढ़ में वनोपज पर आधारित उद्योगों की बहुत संभावनाएं हैं, इस दिशा में काम हो । खनिज आधारित उद्योगों ने तो छत्तीसगढ़ के निवासियो को प्रदूषण के साथ छलावा ही दिया है ।

- छत्तीसगढ़ में करीब़ 12 फीसदी आबादी सतनाम पंथियों की है फिर भी राजनैतिक ताकत क्यों नहीं बन पाई ?

00 सतनाम पंथी आज की गंदी राजनीति को नहीं समझ पा रहे हैं । आज भ्रष्टाचार का ज़माना चल रहा है । चोर-लुटेरे राजनीति में है, पालिटिक्स रह कहां गई है ? अब तो लोग पैसा कमाने के लिए आते हैं या फिर क्रिमनल रिकार्ड को खत्म करने ।

- ऐसे समय में परिवर्तन कैसे हो सकता है ? आपके क्या विचार है ?

00 जनता से ही परिवर्तन आ सकता है ?

- पैसे से टिकट खरीदने वालों को अब जनता देख रही है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा रही है । समाज का भी दायित्व बनता है कि वह अच्छे लोगों को समर्थन देकर आगे लेकर । जनता जब जागरुक होगी तो भ्रष्ट अफसरों को भी सबक सिखायेगी और दलबदलु और भ्रष्ट नेताओं को भी । सामाजिक रुप से आप इस दिशा में क्या प्रयास कर रहे हैं ?

0समाज के जो संगठन है और उनके प्रमुख लोगों से चर्चा होती है कि बदलाव लाना है । परिवर्तन तो होगा वह समय का सिद्धांत है, बस देर हो सकती है ।

- परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के संदेश के आधार पर समाज को क्या कहना चाहेंगे ?

0 सतनाम पंथियों को जो सत्य बोलना चाहिए वहीं वाणी भी मीठी होना चाहिए । अपराध और अप्रिय वचनों से दूर रहें । मांस भक्षण नहीं करना चाहिए और मदिरा पान का त्याग कर दें । जीव हिंसा न करें वहीं व्याभिचार से दूर रहकर संयम का पालन करें ।

- भंडारपुरी के विकास को लेकर क्या कहना है ?

00 भंडारपुरी परमपूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की कर्मभूमि है । इसलिए इसकी बड़ी महत्ता है । पूर्व कांग्रेस शासनकाल में सरकार ने आधे अधूरे मन से कार्य शुरु किया जो अभी तक अधूरा है । मध्यप्रदेश के समय में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 25 लाख रुपए दिए थे फिर छत्तीसगढ़ बना तो अजीत जोगी ने 25 लाख रुपए दिए । वर्तमान भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री ड़ॉ. रमन सिंह ने कहा था कि वे बिना राजनैतिक द्वेषभाव के इसे पूरा करवा चाहते हैं लेकिन अभी तक हो कोई प्रयास नजर नहीं आ रहा है । इन तीन सालों में जो घोषणांए की गई हैं वह धरातल में तो नहीं दिखती इसलिए चुनाव परिणाम वैसे ही दिखे । इनसे सबक लेना चाहिए कि आखिर जनता ने सरकार क्यों बनाई । समाज के लिए जैसा करना चाहिए वैसा क्यों नहीं हो पा रहा है ?

- इस सरकार में समाज के भी प्रतिनिधि मंत्री मण्डल में शामिल है, वो क्यों नहीं उठाते ये सब बातें ?

00 हो सकता है कि मंत्री की कोई राजनैतिक मजबूरी रहे कि इससे उन पर एक समाज के होने का आरोप लग जायेगा और वे आगे नहीं बढ़ पायेगें पर उन्हें ये जान लेना चाहिए कि समाज की वज़ह से ही उनकी बखत है । पांच साल बाद अपने लोगों के बीच ही जाना है । समय-समय पर समाज ने ऐसे लोगों को निपटा दिया है । वर्तमान में जो दूर की सोचेगा वहीं टिकेगा । भटकने वाले लोगों को बाहर का रास्ता जनता दिखा ही देती है । सत्ता-सरकार चार दिन की बात है उसके बाद क्या होगा ? इस मामले में हम तो फिर कहेंगे कि सत्ता प्रमुख को इस बात की समीक्षा करना चाहिए कि सरकार में शामिल प्रतिनिधि अपने समाज के लिए क्या कर रहा है और समाज के लोग उससे संतुष्ट है या नहीं । अगर पार्टी प्रमुख इसकी समीक्षा नहीं करेंगे और इन प्रतिनिधियों के भरोसे रहेगें तो नैय्या डूबेगा ही जैसे कि अभी उपचुनाव के नतीजे दिखे । वक्त है कि सत्ताधीश आंख खोल लें नहीं तो जनता का असली राज आने वाला ही है । अभी तो नकली लोग जनता के पहरेदार बने बैठे हैं । (तपेश जैन स्वतंत्र पत्रकार और छत्तीसगढ़ के प्रख्यात टेलीफिल्म निर्माता-निर्देशक हैं -संपादक)
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1 टिप्पणी:

Sanjeeva Tiwari ने कहा…

छत्‍तीसगढ के धार्मिक व सांस्‍कृतिक धरोहरों के संबंध में आपने पहले भी अच्‍छी जानकारी प्रस्‍तुत की है, गुरू बालकदास का यह साक्षात्‍कार हमें सतनामी समाज के संबंध में बहुत कुछ बता गया, बालकदास जी का यह कहना सौ प्रतिशत सही है कि बोट बैंक की राजनीति से सतनामी समाज को बहुत नुकसान हुआ है, रायपुर में घासीदास प्‍लाजा जैसे समाज के निर्धन छात्रों के लिए बनाये जाने वाले हास्‍टल की आड में समाज के तथाक‍थित नेताओं नें कैसे धन बटोरे व नियम व कानून की कैसे धज्जियां उडाई यह सबको पता है, प्रदेश की 12 फिसदी आबादी करोडों की संपत्ति के एवज में अपने चंद नेताओं को विलासिता का सु,ख देकर अपने बच्‍चों के शिक्षा के आधार को आज भी सडांघ कोठरी में ही महसूस कर रहे हैं और घासीदास प्‍लाजा नित नये उचाईयों को छू रहा है । 25 लाख दिग्विजय, 25 लाख.... के साथ ही 10 करोड घासीदास प्‍लाजा का भी हिसाब समाज के खाते में ही है ।
(लेख् में टंकण संबंधी त्रुटियां हैं कृपया सुधार लेवें - सतनाम ‘ पंथ ‘, सालों से ‘पीटा’ जा रहा, गंदी ‘राजनीति’, तीन ‘बंदरों’, ‘बुरा’ मत )