1/17/2006

मानस को 2005 का अबिंकाप्रसाद दिव्य पुरस्कार


युवा कवि एवं ललितनिबंधकार जयप्रकाश मानस को उनके चर्चित ललित निबंध संग्रह “दोपहर में गाँव ”के लिए वर्ष 2005 का अंबिकाप्रसाद दिव्य रजत अलंकरण पुरस्कार दिया गया है । श्री मानस को यह सम्मान भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक एवं ज्ञानोदय के संपादक श्री प्रभाकर क्षोत्रिय द्वारा प्रदान किया गया । हिन्दी साहित्य जगत् में अत्याधिक लोकप्रिय माना जाने वाला यह पुरस्कार यशस्वी उपन्यासकार, कवि, चित्रकार एवं साठ से महत्वपूर्ण ग्रंथों के सर्जक स्व.अंबिकाप्रसाद दिव्य की स्मृति में विगत 9 वर्षों से अखिल भारतीय स्तर पर संबंधित विधा की श्रेष्ठ कृतियों पर दिया जाता है । इस पुरस्कार का चयन अखिल भारतीय स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाता है जिसमें इस वर्ष प्रख्यात साहित्यकार एवं संस्कृत के वरिष्ट विद्वान डॉ.राधावल्लभ त्रिपाठी, सागर, श्री शिवकुमार श्रीवास्तव, पूर्व कुलपति, हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर, श्री शिवशेखर शुक्ला,(भारतीय प्रशासनिक सेवा) कलेक्टर, सागर सदस्य व श्री जगदीश किंजल्क संयोजक थे ।
अखिल स्तर पर पुरस्कृत होने पर श्री मानस को राज्य के साहित्यकारों ने अपनी बधाई दी है । ज्ञातव्य हो कि श्री मानस की अब तक 15 से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिसमें तभी होती है सुबह, होना ही चाहिए आँगन (कविता संग्रह), कलादास के कलाकारी (छत्तीसगढी भाषा में प्रथम व्यंग्य संग्रह),प्रमुख हैं । "दोपहर में गाँव" कृति पर पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर से भाषा विज्ञान की एक छात्रा द्वारा लघुशोध भी किया जा चुका है । मानस जी ने विहग (हिन्दी कविता में चिडिया पर केंद्रित महत्वपूर्ण संगह), राजभाषा छत्तीसगढी जैसी महत्वपूर्ण कृतियों का संपादन किया है । उन्हें अब तक 7 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं । वे वर्तमान में राज्य शासन के छत्तीसगढी भाषा परिषद के सचिव के पद पर कार्यरत हैं । उनकी यह कृति समूचे विश्व में फैले हिन्दी -पाठकों के लिए बेबसाईट
www.jayprakashmanas.info पर भी उपलब्ध है । लोक एवं शास्त्र को अपने निबंधों का विषय बनाकर ललित रस का संचार करने वाले रचनाकार जयप्रकाश मानस के सम्मान से सृजन-सम्मान परिवार प्रसन्नता का अनुभव कर रही है ।

1 टिप्पणी:

घनश्याम चन्द्र गुप्त ने कहा…

मानस जी:

मेरी ओर से हार्दिक बाधाई स्वीकार करें।

- घनश्याम

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