2/18/2006

होली पर हाइकु


सुश्री प्रेमलता पांडेय

एक

ले टेसू फूल
यमुना जी के कूल
भीगे दुकूल॥


दो

वॄषभानुजा
खेलें होली आ तो जा
ना दे यूं सजा॥


तीन

क्यों मैं आऊं?
रंग में रंगी जाऊं?

भीगी हो जाऊं॥

चार

दाऊ कान्हा के
चित्तचोर राधा के
रंगे आ आ के॥

पाँच

श्याम रंग है?
राधे कौन संग है?
गोप-वॄंद है॥

छः

कान्हा मुस्काए
सब रंग जुटाए
ना डरपाए॥

1 टिप्पणी:

अनुनाद ने कहा…

सुन्दर , अति सुन्दर , सरस , सरल |