
सुश्री प्रेमलता पांडेय
एक
ले टेसू फूल
यमुना जी के कूल
भीगे दुकूल॥
दो
वॄषभानुजा
खेलें होली आ तो जा
ना दे यूं सजा॥
तीन
क्यों मैं आऊं?
रंग में रंगी जाऊं?
भीगी हो जाऊं॥
चार
दाऊ कान्हा के
चित्तचोर राधा के
रंगे आ आ के॥
पाँच
श्याम रंग है?
राधे कौन संग है?
गोप-वॄंद है॥
छः
कान्हा मुस्काए
सब रंग जुटाए
ना डरपाए॥
1 टिप्पणी:
सुन्दर , अति सुन्दर , सरस , सरल |
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